2 शमूएल: दाऊद का राज्याभिषेक और चुनौतियाँ
2 शमूएल, बाइबिल का नौवां ग्रंथ है, जो दाऊद के राज्याभिषेक, उसके राज्य के विस्तार, और उसके जीवन में चुनौतियों का वर्णन करता है।
2 शमूएल, बाइबिल का नौवां ग्रंथ है, जो दाऊद के राज्याभिषेक, उसके राज्य के विस्तार, और उसके जीवन में चुनौतियों का वर्णन करता है।
1 शमूएल, बाइबिल का आठवां ग्रंथ है, जो इस्राएल के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ का वर्णन करता है। यह पुस्तक न्यायियों के काल के अंत से लेकर शाऊल के राज्याभिषेक तक की अवधि को कवर करती है।
रूत, बाइबिल का छोटा पर प्रभावशाली ग्रंथ है, जो मोआबी विधवा रूत की कहानी को बताता है, जो अपने सास नाओमी के साथ इस्राएल लौटती है और अंततः दाऊद के वंशावली में शामिल हो जाती है।
न्यायियों, बाइबिल का सातवां ग्रंथ है, जो इस्राएलियों के कनान देश में बसने के बाद के काल का वर्णन करता है। इस अवधि में इस्राएली लोग बार-बार परमेश्वर से दूर हटते हैं और उसके परिणामस्वरूप विदेशी शक्तियों के अधीन हो जाते हैं। परमेश्वर की दया से, वह समय-समय पर न्यायियों को उठाता है जो उन्हें मुक्ति दिलाते हैं।
यहोशू, बाइबिल का छठा ग्रंथ है, जो इस्राएलियों को वादा किए गए देश कनान में ले जाने और उस पर विजय प्राप्त करने की कहानी को बताता है।
व्यवस्थाविवरण, बाइबिल का पांचवां ग्रंथ है, जिसमें मूसा द्वारा इस्राएलियों को वादा किए हुए देश में प्रवेश करने से पहले उनके जीवन के नियमों और परमेश्वर के साथ उनके संबंधों की पुनरावृत्ति की जाती है।
गिनती, बाइबिल का चौथा ग्रंथ है, जो इस्राएलियों की मरुभूमि में यात्रा, जनगणना, और परमेश्वर के साथ उनके संबंध को विस्तार से बताता है।
लैव्यव्यस्था, बाइबिल का तीसरा ग्रंथ है, जो इस्राएलियों के लिए पवित्रता, आराधना और परमेश्वर के साथ सही संबंध स्थापित करने के नियमों और विधानों को प्रस्तुत करता है।
निर्गमन, बाइबिल का दूसरा ग्रंथ है, जो इस्राएलियों की मिस्र से मुक्ति और सिनाई पर्वत पर परमेश्वर के साथ उनके करार की कहानी को विस्तार से बताता है।
उत्पत्ति: सृष्टि, प्रारंभिक मानव इतिहास, वादों का समय, और नैतिक शिक्षाओं की पुस्तक, जो ईसाई धर्म के मूल विश्वासों और परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं को दर्शाती है।